Black Wheat Benefits :- नमस्कार दोस्तों, आपने पिछले कुछ दिनों से काले गेहूं के बारे मे जरुर सूना होगा, लेकिन आपको ये पता नहीं होगा की इसकी खेती कैसे की जाती हैं और इस काले गेहूं के क्या क्या लाभ हैं| काले गेहूं के बारे मे यह भी कहा जा रहा हैं की इसे खाने से सेहत भी अच्छी बनी रहती हैं और बड़े बड़े रोगों का निवारण भी हो सकता हैं| आज के इस पोस्ट मे हमने इसी काले गेहूं के बारे मे पुरी जानकारी प्रदान की हैं जैसे की इसकी खेती कैसे कर सकते हैं और इस गेहूं का बाजार मे क्या भाव चल रहा हैं|
काले गेहूं एक खास क़िस्त के खेती के माध्यम से उगाया जाता हैं| इसमें सामान्य गेहूं की तुलना में पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती हैं| हमारे देश मे इस तरह की गेहूं की खेती पहले नहीं होती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से इस काले गेहूं की खेती कुछ राज्यों मे की जा रही हैं| इस गेहूं मे अधिक पोषण तत्व पाने जाने के कारण लोग इस काले गेहूं की मांग बाजार मे ज्यादा कर रहे हैं| इसकी मांग बढ़ने के कारण सभी किसानों को बहुत ज्यादा आमदनी हो रही हैं|
यदि आप भी एक किसान हैं और जानना चाहते हैं की इस काले गेहूं की खेती कैसे की जाती हैं तो इसकी पुरी जानकारी इस आर्टिकल मे माध्यम से प्रदान की जा रही हैं| इस काले गेहूं की खेती करने से बहुत कम समय मे ही आप बहुत अधिक पैसे कमा सकते हैं| काली गेहूं की खेती, लाभ, बीज, उपयोग, उत्पत्ति, आटा का मूल्य इन सभी की जानकारी आप सभी को शेयर की जा रही हैं|
आपने अभी तक सामान्य रंग के गेहूं यानि की पीले या हल्के भूरे रंग के गेहूं के बारे मे भी जानते होंगे, लेकिन अब हमारे देश मे काले गेहूं की खेती भी की जा रही हैं| जब यह काले गेहूं की खेती की जाती हैं तो तो इसकी बालियाँ आम आम गेहूं की तरह हरे रंग की होती हैं| इसके बाद जब यह पकने लगती हैं तो इनके दानों की रंग धीरे धीरे काला होने लगता हैं| इस गेहूं की आटे की रोटियां भी हल्की काले रंग की होती हैं|
इस काले गेहूं की पहचान सबसे पहले पंजाब के मोहाली स्थित नैशनल एग्री फ़ूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट यानि नाबी मे हुई थी| आपको बता दें वहां के डॉक्टर्स इसके पहले नीले एवं जामुनी रंग के गेहूं की किस्म भी विकसित कर चुके हैं| यह गेहूं काले रंग की इसलिए हो जाती हैं क्योंकि इसमें पाया जाने वाला एक खास किस्म का पिगमेंट होता हैं जिसे एंथोसायनिन नाम से जाना जाता है, इस गेहूं मे इस पिगमेंट की मात्रा अधिक पाए जाती हैं|
यदि आप काले गेहूं की खेती करते हैं, तो आप इससे बहुत लाभ कमा सकते हैं, क्योंकि यह बाजार में बहुत महंगे दामों में बेचा जाता है, और इसमें पोषक तत्वों की अधिकता के कारण लोग इसे अधिक खरीदते भी हैं| आने वाले समय में इसकी मांग और बढ़ सकती है, इसलिए आप काले गेहूं की खेती को समृद्ध बना सकते हैं|
एंथोसायनिन पिगमेंट की अधिकता के कारण किसी खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जी या अनाज का रंग गहरा हो जाता हैं| यह एक तरह का नेचुरल एंटी ओक्सिडेंट भी होता है जो कि स्वस्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है| इसकी पिगमेंट की अधिकता के कारण इस काले गेहूं मे पोषण तत्व की मात्रा काफी अधिक बढ़ जाती हैं|
आपको बता दें सामान्य गेहूं मे एंथोसायनिन पिगमेंट की मात्र केवल 5 पीपीएम होती हैं लेकिन काले रंग के गेहूं में इसकी मात्रा 100 से 200 पीपीएम तक होती है| इस काले गेहूं मे आयरन और स्टार्च की मात्रा सामान्य गेहूं से 60% तक अधिक पाई जाती हैं|
काले गेहूं की खेती सामान्य गेहूं की तरह की जाती है, और इसके लिए, बीज की बुवाई के लिए निश्चित समय के साथ-साथ पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है ताकि उपज अच्छी हो सके| यदि गेहूं को सीडड्रिल से बोया जाता है, तो यह उर्वरक और बीज दोनों को बचाता है| इसकी पैदावार भी सामान्य गेहूँ से अधिक होती है, जो 10 से 12 क्विंटल प्रति बीघा होती है|
यदि आप एक काली गेहूं की बुवाई लाइन लगाते हैं, तो सामान्य अनाज का उपयोग 100 किलोग्राम और मोटे अनाज का उपयोग 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से किया जाता है|और यदि छिड़काव के रूप में बोया जाता है, तो सामान्य अनाज 125 किलोग्राम और मोटे अनाज 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग किया जाता है|
काले गेहूं की बुवाई से पहले, इसके प्रतिशत की जांच करें, यह सुविधा राज्य अनुसंधान केंद्र द्वारा मुफ्त प्रदान की जाती है|यदि आप इसे ऐसे क्षेत्र में बोते हैं जहाँ सिंचाई सीमित है, तो इसे रगवे विधि के माध्यम से बोया जाना चाहिए| इस विधि में सामान्य अनाज 75 किलोग्राम और मोटा अनाज 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से होता है|
जिस क्षेत्र में आपको काले गेहूं की खेती करनी है, आपको पहले उस क्षेत्र की तैयारी करनी होगी| इसके लिए आपको एक एकड़ जमीन से ड्रिल के माध्यम से कम से कम 10 किलो जिंक सल्फेट, 45 किलो यूरिया, 20 किलो मूरा पोटाश और 50 किलो डीएपी खाद डालनी होगी| यदि आप पहली सिंचाई के समय 60 किग्रा यूरिया डालते हैं, तो यह भी सही है लेकिन इसे बुवाई से 3 सप्ताह पहले डालें|
इसके बाद, कटाव के समय सिंचाई आवश्यक है, जबकि गाँठ बनाते समय, बालियां निकलने से पहले, इसके दुहने की स्थिति में और जब दाने पकने लगते हैं तब भी इसके कारण काले गेहूं की पैदावार बहुत अच्छी होती है|
काले गेहूं का आटा कुछ ई-कॉमर्स साइटों के माध्यम से भी बेचा जा रहा है| गेहूं के आटे को बेचने वाली ऐसी साइटों में इसकी कीमत 2 हजार रुपये प्रति किलोग्राम से 4 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है|
=> काले गेहूं की खेती रिसर्च नेशनल एग्री फ़ूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट नाबी मोहाली पंजाब में सबसे पहले की गई थी, जिसे अब अन्य राज्यों मे की की जा रही हैं|
=> ये गेहूं काले रंग के होते हैं जिसमें एंथोसायनिन नाम का पिगमेंट पाया जाता है, इसकी मात्रा अधिक होने से फल, सब्जी एवं अजान नीले, बैंगनी या काले रंग के हो जाते हैं|
=> काले गेहूं को साधारण गेहूं की तरह ही बो कर उगाया जाता है, इसकी उपज 10-12 क्विंटल प्रति बीघा होती है|
=> काले गेहूं का भाव सामान्य गेहूं की तुलना में अधिक होता है काले गेहूं प्रति क्विंटल 3500 से 4000 रूपये में बिकते हैं, जबकि सामान्य गेहूं लगभग 1800 से 2100 रूपये प्रति क्विंटल में बेचा जाता है|
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