LPG Gas Subsidy :- नमस्कार दोस्तों, जैसा की हम सभी जानते हैं की कुछ महीने से हमें एलपीजी गैस सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं मिल रही हैं| इसके पीछे क्या कारण हैं उसकी पुरी जानकारी आज के इस पोस्ट मे दी गई हैं| हमारे देश मे पिछले एक सालों से कच्चे तेल मे 40 फीसदी तक गिरावट आई हैं, लेकिन इसी अवधि मे एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम मे 20 फीसदी तक बढ़े हैं| जिसकी वजह से कुछ ग्राहकों को अभी तक बहुत छोटी सब्सिडी मिल रही हैं, क्योंकि उनके लिए अंतिम कीमत स्थानीय परिवहन लागत पर निर्भर करता हैं|
यह एलपीजी गैस सब्सिडी के खत्म होने के दो बड़े कारण हैं, जिनमे सब्सिडी वाले ग्राहकों के लिए शुद्ध मूल्य में मासिक वृद्धि और वैश्विक दरों में हाल ही में आई गिरावट शामिल है| जैसा की आप सभी को पता होगा की केरोसीन सब्सिडी मार्च मे ही खत्म हो गई हैं| अब इस एलपीजी पर सब्सिडी खत्म होना सरकार के लिए एक बड़ी राहत की बात हैं, क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ा हैं|
पुरे देश मे 14 किलोग्राम एलपीजी गैस सिलेंडर की दाम की बात करें तो पिछले साल जून मे 497 रुपये थी जो की अब इस साल बढ़कर 593 रूपये हो चुकी हैं| किसी भी ग्राहक के लिए सब्सिडी इस अवधि मे 240 रूपये से गिरकर शून्य हो गई हैं| हालाँकि इसका एक समाधान भी हैं, अगर एलपीजी की लागत बढे तो इसमें बदलाव भी हो सकते हैं|
इसी कारण भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक मई और जून महीने के लिए सब्सिडी नहीं मिलेगी| भविष्य मे अगर एलपीजी के कीमतों मे बदलाव आती हैं, तो सब्सिडी उसी के अनुसार दी जाएगी| लेकिन सबसे पहले ये पूरा मामला आप सभी को समझना बहुत जरुरी हैं, निचे हमने इस बारे मे विस्तार रूप से जानकारी प्रदान की हैं|
एलपीजी गैस सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं मिलने का पूरा मामला हाल के कुछ महीनों से जुड़ा हुआ हैं| पिछले एक साल मे एलपीजी रिफिल का बाजार मूल्य 737.5 रुपये प्रति सिलेंडर से घट कर 593 रुपये हो गया है| जिसके पीछे का कराण कोरोना वायरस महामारी के चलते मांग मे भारी गिरावट की वजह से कच्चे तेल मे कीमतों मी आई गिरावट हैं|
इसी दौरान केंद्र सरकार के निर्देश पर सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 96 रुपये से बढ़कर 593 रुपये हो गई हैं| सभी सरकारी कंपनियों ने गैस की कीमत मे बढ़ोतरी की हैं| प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन प्राप्त करने वाले ग्राहकों को भी 8 रुपये ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा हैं, जबकि अन्य ग्राहकों को भी 29 रुपये ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा हैं|
ऐसा नहीं है कि किसी को सब्सिडी नहीं मिल रही है| बल्कि, उन्हें 10-12 रुपये की बहुत कम सब्सिडी मिल रही है, जो एक उच्च मर्केल मूल्य का भुगतान कर रहें है| दरअसल एलपीजी की कीमतें शुल्क के साथ बदलती रहती हैं|
देश के कुल 28 करोड़ एलपीजी ग्राहकों में से, लगभग 1.5 करोड़ ग्राहकों को सब्सिडी नहीं मिलती है और अन्य 8 करोड़ उज्जवला योजना के लाभार्थी हैं| सरकार द्वारा 2019-20 में दी गई एलपीजी सब्सिडी पिछले साल के 31,447 करोड़ रुपये की तुलना में 22,635 करोड़ रुपये थी|
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